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लप्रेक (लघु प्रेम कथा) नंबर 20:

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के रसायन विभाग से भागकर दोनों सीधा पंत पार्क पहुंचे।

रात की बतझक को लेकर शिखा किसी केमिस्ट्री की उबलती टेस्टट्यूब जैसे फड़फड़ा रही थी। बगल में खड़ा संदीप एक लिटमस पेपर जैसा अपना रंग खोज रहा था। उबलती हुई शिखा नें जैसे ही अपना अमल संदीप पर डालना शुरू किया।

तभी संदीप ने अपनी मुठ्ठी में कुछ छुपाते हुए शिखा के हथेली पर रख दिया।

“मैंने आजतक किसी केमिस्ट्री के सूत्र में सल्फ्यूरिक अमल का आइसक्रीम के साथ रासायनिक अभिक्रिया करते नहीं देखा।” शिखा नें बड़बड़ाते हुए कहा

“मेरे चेहरे पर का रंग भी तो कौन सा विलयन होने का संकेत दे रहा।” संदीप ने हंसते हुए कहा

फिर शिखा ने अपनी बैग में से काजल निकाला और आंखों ही आंखों में दोनों नें जाने कितने अपवाद रासायनिक समीकरण लिख डाले।

©खामोशियाँ-2019 | मिश्रा राहुल
(डायरी के पन्नो से)(30-अगस्त-2019)

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